" एक शरीर में रहते हुए नारी माँ नहीं होती| माँ की दृष्टि में छमा होती है, मन में वात्सल्य होता हैऔर दान में हाथ उठा है; नारी की दृष्टि में निषेद और आलोचना, मन में कामना और हाथ याचना में फैला होता है| माँ का समर्पण का सात्विक जीवन जीती है; नारी समर्पित नहीं बल्कि समर्पण मांगती है| सरलता का कोई तत्व उसके निर्माण में होता ही नहीं है|"
उधृत: 'कर्म" - लेखक नरेन्द्र कोहली
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Thursday, July 9, 2009
Monday, April 27, 2009
jeevan ek avsar
जीवन एक अवसर है, जहाँ सब उपलब्ध है| वह सब उपलब्ध है जिससे हम आप्तकाम हो जायें|
जीवन में आनंद आता नहीं, लाना पड़ता है| जीवन में आनंद मिलता नहीं अर्जित करना पड़ता है| आनंद प्रयत्न है, संकल्प है, श्रम है| आनंद साधना है|
सूत्र: जन्म को सब कुछ नहीं मन लेना चाहिए|
सूत्र: जीवन को मनुष्य इस भांति स्वीकार करता है कि उस स्वीकृति के कारण ही जीवन से आनंद पैदा होने कि सारी गुंजाईश टूट जाती हैं| सारे द्वार बंद हो जाते हैं|
उधृत: "समुंद सामना बूँद में" लेखक ओशो
जीवन में आनंद आता नहीं, लाना पड़ता है| जीवन में आनंद मिलता नहीं अर्जित करना पड़ता है| आनंद प्रयत्न है, संकल्प है, श्रम है| आनंद साधना है|
सूत्र: जन्म को सब कुछ नहीं मन लेना चाहिए|
सूत्र: जीवन को मनुष्य इस भांति स्वीकार करता है कि उस स्वीकृति के कारण ही जीवन से आनंद पैदा होने कि सारी गुंजाईश टूट जाती हैं| सारे द्वार बंद हो जाते हैं|
उधृत: "समुंद सामना बूँद में" लेखक ओशो
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